कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की हुई बैठक
कृषि नवाचार, प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग एवं जल संरक्षण पर हुआ मंथन
कवर्धा, 20 जुलाई 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा में कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कृषि विज्ञान केन्द्र बिलासपुर, भाटापारा, मुंगेली एवं कवर्धा के वार्षिक प्रतिवेदन एवं आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों, प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग, जल संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया गया।
बैठक के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. जी.पी. आयाम ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र जिले के किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ कृषि उत्पादन बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. राजीव श्रीवास्तव, अधिष्ठाता, संत कबीर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कवर्धा, डॉ. मनोरमा, अधिष्ठाता, स्वर्गीय श्री पुनाराम निषाद मात्स्यिकी महाविद्यालय, कवर्धा सहित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी तथा प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में कृषि विज्ञान केन्द्र बिलासपुर, भाटापारा, मुंगेली एवं कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुखों ने वर्ष 2026-27 का वार्षिक प्रतिवेदन तथा वर्ष 2027-28 की कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इसमें विभिन्न फसलों पर किए गए प्रक्षेत्र परीक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन एवं किसानों तक पहुंचाई गई तकनीकों की जानकारी साझा की गई।
कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले की प्रमुख दलहन, तिलहन, सब्जी एवं फलवर्गीय फसलों पर विभिन्न प्रक्षेत्र परीक्षण एवं अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किए गए। साथ ही किसानों के खेतों पर समन्वित कृषि प्रणाली तथा प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। बैठक में वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में जैव उर्वरकों, हरी खाद एवं अन्य वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए धान की कतार बोनी तकनीक को अधिक से अधिक अपनाने, इससे जुड़ी समस्याओं के समाधान तथा किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया।
प्रगतिशील कृषक श्रीमती अदिति कश्यप ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुझाव दिए। श्री नेतराम चंद्रवंशी ने धान में झूठा कंडवा रोग के प्रभावी प्रबंधन पर अनुसंधान एवं तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता बताई, जबकि श्री रूपेन्द्र जायसवाल ने जल संरक्षण एवं लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा देने का सुझाव रखा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रंजित राजपूत ने कृषक समूहों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को सामूहिक रूप से कार्य कर बेहतर मार्केट लिंकेज विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य, प्रगतिशील कृषक तथा कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा, बिलासपुर, भाटापारा एवं मुंगेली के वैज्ञानिकों सहित लगभग 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया।


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