प्रशासन के लिखित आश्वासन और जांच आदेश के बाद कबीरधाम में आदिवासियों का अनिश्चितकालीन धरना स्थगित; 10 दिनों में मांगें पूरी न होने पर चक्काजाम की चेतावनी
**कबीरधाम।**
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (शाखा कबीरधाम) के जिलाध्यक्ष **कामू बैगा** के नेतृत्व में पिछले दो दिनों (9 जुलाई से 10 जुलाई की रात तक) से चल रहा आदिवासियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया है। कबीरधाम कलेक्टर, डीएफओ (वनमंडलाधिकारी) और सहायक आयुक्त के साथ हुई मैराथन बैठकों, कागजी कार्रवाई और प्रशासन द्वारा जांच के लिखित आदेश दिए जाने के बाद कामू बैगा और ग्रामीणों ने आपसी सहमति से प्रदर्शन को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया।
**जमीन विवाद को लेकर आंदोलित थे ग्रामीण**
उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले के ग्राम नागा डबरा और चिता डबरी के ग्रामीण अपने लंबे समय से लंबित जमीन संबंधी प्रकरणों को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए थे। न्याय न मिलने से नाराज ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ कलेक्ट्रेट के सामने डटे हुए थे।
**आंदोलन में ये प्रमुख लोग रहे शामिल**
इस दो दिवसीय उग्र आंदोलन और प्रशासनिक वार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रमुख पदाधिकारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से:
* **परिषद के महासचिव:** दिलावर पारधी, कमल धुर्वे
* **कोषाध्यक्ष:** ओमकार सिंद्राम
* **कानूनी सलाहकार:** आत्मा धुर्वे, सलीम पारधी
* **प्रमुख सदस्य व ग्रामीण:** महेश धुर्वे, हेमलाल मरकाम, मनीष कुमार यादव, मियांजी बैगा, लमान सिंह बैगा, लमना बैगा, तिहार सिंह बैगा और राजा बैगा सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
**10 दिन का अल्टीमेटम: मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा चक्काजाम**
धरना समाप्त करते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष कामू बैगा और आंदोलनकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए प्रदर्शन को केवल **10 दिनों के लिए स्थगित** किया गया है। यदि तय समय-सीमा के भीतर ग्रामीणों की जमीनी समस्याओं का स्थायी निराकरण नहीं किया गया, तो आदिवासी समाज पुनः उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसके तहत कलेक्ट्रेट का घेराव और व्यापक चक्काजाम किया जाएगा।
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