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भोरमदेव अभयारण्य में वन्यप्राणी सप्ताह के तहत WTI ने आयोजित किया संवेदीकरण कार्यक्रम





क्र .30 दिनांक 07.10.202 

भोरमदेव अभयारण्य में वन्यप्राणी सप्ताह के तहत WTI ने आयोजित किया संवेदीकरण कार्यक्रम


 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक शासन द्वारा संचालित सेवा संकल्प अभियान एवं 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक आयोजित वन्यप्राणी सप्ताह के अंतर्गत कवर्धा के वनमंडलाधिकारी (DFO) श्री निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन में भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मैदानी अमले की क्षमता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वन विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम दिनांक 06.10.2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वन विभाग ने Wildlife Trust of India (WTI) के सहयोग से किया।


कार्यक्रम में वन्यप्राणी सप्ताह की थीम “Connecting Habitat, Thriving Wildlife” पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने वन्यजीव संरक्षण, उनके सुरक्षित भविष्य तथा प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।


इस अवसर पर वन्यजीव कॉरिडोर के महत्व, वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही, कैमरा ट्रैप के प्रभावी उपयोग एवं निगरानी तथा वन्यजीव अपराध और अवैध वन्यजीव व्यापार की रोकथाम से संबंधित विषयों पर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। साथ ही, संरक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग और मैदानी स्तर पर सतत निगरानी की भूमिका के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।


कार्यक्रम में WTI की ओर से प्रोजेक्ट हेड एवं ऑफिसर इन चार्ज श्री अंकित ठाकुर, सहायक प्रबंधक (समाजशास्त्री) डॉ. महेंद्र राउत, फील्ड ऑफिसर (जीवविज्ञानी) श्री वेदांग सैखेडकर तथा प्रवर्तन अधिकारी श्री शारिक अशर उपस्थित रहे।


भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य की अधीक्षक श्रीमती अनिता साहू ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में फ्रंटलाइन स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में स्टाफ के व्यवहार और भूमिका पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, वैज्ञानिक तकनीकों, सतत निगरानी और विभागीय समन्वय के माध्यम से वन्यजीव अपराधों की रोकथाम तथा संरक्षण कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।


कार्यक्रम में रेंजर श्री किशोर साहू सहित विभागीय फ्रंटलाइन स्टाफ एवं समर्थ ग्रुप के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मैदानी अमले को वन्यजीवों की निगरानी, अपराधों की पहचान और उनकी रोकथाम के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।


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