आंगनबाड़ी केन्द्रों में शाला पूर्व शिक्षा सामग्री की नियमित उपलब्धता, जनभागीदारी से खिलौना संग्रह को मिल रहा बढ़ावा
मार्च 2026 में राज्य स्तर से 11 प्रकार की प्री-स्कूल किट आंगनबाड़ी केन्द्रों को की गई प्रदाय, ‘आंगन मिलन सेवा’ के तहत समुदाय भी निभा रहा सहभागिता
कवर्धा, 24 सितंबर 2026। जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शासन द्वारा नियमित रूप से आवश्यक शिक्षण एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य स्तर से मार्च 2026 में ही 11 प्रकार की शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा किट एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्रदाय की गई है। प्राप्त प्री-स्कूल किट में बिल्डिंग ब्लॉक, कलर बीड्स, क्रेयॉन्स, फ्लाइंग डिस्क, एनिमल कटआउट, प्लास्टिक बॉल, प्लास्टिक वेजिटेबल, डॉक्टर किट, क्राफ्ट पेपर, गुड़िया सहित विभिन्न प्रकार की सामग्री शामिल है। वर्तमान सत्र में भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक इसी प्रकार की शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा सामग्री एवं खिलौने प्राप्त होंगे। यह प्रत्येक वर्ष की नियमित एवं आवर्ती प्रक्रिया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आनंद तिवारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों द्वारा खेल-खेल में खिलौनों का उपयोग किए जाने से समय के साथ उनकी टूट-फूट होना स्वाभाविक है। इसे ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुराने कपड़ों, मिट्टी, कागज तथा अन्य स्थानीय संसाधनों से बच्चों के लिए उपयोगी खिलौने एवं शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए भी संवेदित किया गया है। इस पहल से बच्चों की सृजनात्मकता एवं कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने के साथ-साथ केन्द्रों में शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा सामग्री को निरंतर बनाए रखने में मदद मिल रही है।
*सेवा संकल्प अभियान में स्वैच्छिक जनभागीदारी को दिया जा रहा बढ़ावा*
वर्तमान में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘आंगन मिलन सेवा’ गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से समुदाय को आंगनबाड़ी केन्द्रों की गतिविधियों से जोड़ने तथा बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में समुदाय के लोगों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों के लिए खिलौने देने हेतु भी प्रेरित किया जा रहा है। यह पहल पूरी तरह स्वैच्छिक है। कई परिवारों में बच्चों के बड़े हो जाने के बाद उनके पुराने खिलौने उपयोग में नहीं आते। ऐसे परिवारों की सकारात्मक सोच को दिशा देते हुए इन खिलौनों को आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जिले के लगभग 200 आंगनबाड़ी केन्द्रों में समुदाय द्वारा स्वस्फूर्त रूप से खिलौनों का योगदान किया गया है। इससे बच्चों को अतिरिक्त खेल सामग्री उपलब्ध होने के साथ ही समुदाय और आंगनबाड़ी केन्द्रों के बीच अपनत्व एवं सहभागिता की भावना भी मजबूत हो रही है।
*आंगनबाड़ी केन्द्रों को जनभागीदारी से सशक्त बनाने की पहल*
आंगनबाड़ी केन्द्रों में शासन द्वारा नियमित रूप से शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। खिलौना संग्रह की यह पहल शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सामग्री के अतिरिक्त समुदाय की स्वैच्छिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्रों को जनभागीदारी से और अधिक सशक्त बनाने, समुदाय में अपनत्व की भावना विकसित करने तथा बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल है। सामूहिक सहभागिता से आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के लिए सीखने, खेलने और सृजनात्मक विकास के और अधिक प्रभावी केन्द्र के रूप में विकसित होंगे।


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