कबीरधाम में नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन, 11 करोड़ से अधिक राशि के 32 हजार 763 वाद किए गए निराकृत
लोक अदालत में समझौता के आधार वर्षों से चल रहे वैवाहिक विवाद का निराकरण
पांच वर्ष पुरानी दुश्मनी को भुलाकर पड़ोसी के साथ हुआ समझौता
कवर्धा, 14 मार्च 2026/ 14 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य में तालुका न्यायालय के स्तर से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक सभी न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत आयोजित किया गया। माननीय श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कबीरधाम द्वारा उक्त नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ मां सरस्वती माँ के छाया चित्र पर पूजा अर्चना करते हुए दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
उक्त लोक अदालत में जिले में कुल 12 खण्डपीठ गठित किया गया था, जिसमें से 11 खण्डपीठ जिला मुख्यालय कबीरधाम में तथा 01 खण्डपीठ व्यवहार न्यायालय, पण्डरिया में गठित की गई थी। जिसमें राजीनामा योग्य समस्त दाण्डिक मामले, चेक बाउन्स के प्रकरण, समस्त प्रकार के व्यवहार वाद प्रकरण, मोटर दुर्घटना से उत्पन्न दावा प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय में लंबित वैवाहिक विवाद से संबंधित प्रकरण, इसके साथ ही प्री-लिटिग्रेशन (मुकदमा पूर्व वाद प्रकरण) यथा बिजली बिल, दूरभाष, बैंक लोन, जलकर से संबंधित प्रकरण रखे गए थे।
उल्लेखनीय है कि, नेशनल लोक अदालत के खण्डपीठ क्रमांक 01 में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कबीरधाम श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे द्वारा मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में कुल 47 लाख 40000 रूपये की अवार्ड राशि पारित किया गया तथा माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे द्वारा एक प्रकरण की सुनवायी पक्षकारों की सुविधा को दृष्टिगत् रखते हुए पक्षकार को वर्चुअल माध्यम से सुनवायी कर निराकृत किया गया। खण्डपीठ क्रमांक 02 परिवार न्यायालय कबीरधाम में पीठासीन अधिकारी श्री लीलाधर सारथी, द्वारा परिवार न्यायालय में वैवाहिक विवाद से संबंधित प्रकरण में कुल 31 प्रकरणों का निराकरण करते हुए वैवाहिक संबंधो में मधुरता स्थापित करते हुए सुखद दाम्पत्य का पुर्नस्थापन किया गया। खण्डपीठ क्रमांक 03 पीठासीन अधिकारी श्रीमती योगिता विनय वासनिक द्वारा विद्युत प्रकरण में कुल 5 लाख 7189 रूपये राशि की वसूली करते हुए प्रकरण का निराकरण किया गया। इसी अनुक्रम में राजस्व न्यायालय में कुल 26 हजार 252 लंबित प्रकरणों का निराकरण करते हुए लाभान्वित हितग्राहियों को कुल 10 करोड़ 18 लाख 44 हजार 934 रूपये का निराकरण किया गया। इस प्रकार जिला कबीरधाम अंतर्गत परिवार न्यायालय, कबीरधाम में उक्त लोक अदालत में वैवाहिक प्रकरणों में 31 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 6 लाख 35000 रूपये का निराकरण, जिला न्यायालय कबीरधाम द्वारा सिविल मामले में कुल 17 लाख 52000 रूपये, नगर पालिका कबीरधाम द्वारा जलकर तथा दुकान किराया से संबंधित मामलो में 257 प्रकरण में 2 लाख 23 हजार 950 रूपये की वसूली की गई। इस प्रकार लोक अदालत में कुल 32 हजार 763 लंबित प्रकरण का निराकरण करते हुए 11 करोड़ 21 लाख 14 हजार 828 रूपये से संबंधित वाद का निराकरण किया गया।
*लोक अदालत में समझौता के आधार वर्षों से चल रहे वैवाहिक विवाद का निराकरण*
परिवार न्यायालय, कबीरधाम में लंबित एक प्रकरण में एक दम्पत्ति के मध्य
उत्पन्न वाद लगभग 25-30 वर्ष तक भरण-पोषण का मामला चल रहा था जिसमें महिला 70 वर्षीय तथा पति 75 वर्षीय वृद्ध थे। वृद्ध पति के द्वारा विगत वर्षों से महिला को भरण-पोषण भत्ता अदा किया जा रहा था। परिवार न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश के द्वारा दोनों पक्षों से बात कर उन्हें कौटुम्बिक विवाद के वैकल्पिक समाधान के सभी माध्यमों से अवगत् कराया गया। जिससे उन वृद्ध दम्पत्ति के द्वारा एकमुश्त भरण-पोषण भत्ते के विकल्प का चुनाव करते हुए वर्षों से उनके मध्य चल रहे भरण-पोषण के विवाद का अंत हुआ।
*पांच वर्ष पुरानी दुश्मनी को भुलाकर पड़ोसी के साथ हुआ समझौता*
कबीरधाम न्यायालय में वर्ष 2021 को दर्ज कराये गये एक प्रकरण में प्रार्थी एवं मकान मालिक के मध्य किराया के लेनदेन को लेकर पीड़ित पक्ष व आरोपी पक्ष के बीच वाद-विवाद बढ़ने से उनका मामला माननीय न्यायालय में संस्थित किया गया था। इस लोक अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट वरिष्ठ श्रेणी कु० किरण पन्ना के द्वारा दोनों पक्षों को समझाईश देने तथा समझौता कराने से दोनों पक्षो के बीच उत्पन्न हुई दुश्मनी को भुलाकर दोनों पक्षो के द्वारा अपने बैर-भाव को भुलाकर पड़ोसी के साथ सद्भाव का माहौल तैयार किया गया।
*नेशनल लोक अदालत को यादंगार बनाने सेल्फी प्वाइंट तथा स्वास्थ्य शिविर-*
नेशनल लोक अदालत की भव्यता देखते ही बन रही थी। जिला न्यायालय के प्रवेश द्वार पर यहां सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था। जिसमें पक्षकार अपनी फोटो तस्वीरों के माध्यम से जीवंत रख रहे थे। इस दौरान न्यायालय परिसर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में आये हुए पक्षकारों द्वारा स्वास्थ्य लाभ भी लिया जा रहा था।


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